गुरुवार, 11 नवंबर 2010

अनंत आकाश

अनंत आकाश
अनंत आकाश का अर्थ समझाना जरा कठिन है, क्योंकि जो अनंत है उसको वर्णन करना मुझ जैसे नौसिखिये के बस का रोग नहीं है और फिर  यह मेरा पहला ब्लॉग है, और पहला ब्लॉग भी पहले प्यार के सामान होता है जिसमे यह नहीं पता नहीं होता की शुरू कहाँ से किया जाये. विद्यालयी शिक्षा ने जो ज्ञान मुझे दिया बस उसी के कुछ अंश प्रकाशित करना चाहूँगा.
स्कूल कॉलेज में हालाँकि पढाई तो होती है यह सत्य है, किन्तु उस पढाई में कितना समझ आता है वह महत्वपूर्ण है, मुझे स्कूल के शुरुवाती दिन याद हैं जब मैं प्राथमिक स्कूल में पढता था. तब मैं पढने लिखने अच्छा था, किन्तु समय बीतने के साथ और कई व्यवधानों के कारण में मध्यम स्तर पर आ गया, एक तो मेकाले का सिलेबस और सारे अनजाने कारण इसके पीछे थे, और यही सब मेरे अन्दर की प्रेरणा बन गए..शायद...
और क्या लिखू, अभी तो शुरुवात है, परन्तु यह बताना चाहूँगा, की शायद प्रेमचंद एवं अन्य हिंदी साहित्यकारों की रचनायें जो मैंने बचपन में पढ़ी थी, वो सब शायद मुझे शीघ्र ही कुछ नया लिखने की प्रेरणा देंगे.
आपका
अनिरुद्ध

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